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दीपावली खुशियों का त्यौहार है खुशी खुशी मनाएं दिवाली

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ठूठीबारी /महराजगंज :-

दीपावली विश्व वन्धुत्व की भावना से परिपूर्ण त्यौहार है।दीपावली न केवल बाहर के तम को दूर करने का पर्व हैं, बल्कि अन्दर के क्लेश को भी दूर करने का एक महान पर्व है।वह जगत के साथ स्वयं को आलोकित करने का त्यौहार हैं।अपने अन्दर बसुधैव कुट्म्बकम् की भावना को विकसित करना ही सही अर्थो में दीपावली हैं।संसार के किसी भी कोने मे रहने वाले मनुष्य को यह अनुभव करना होगा कि यह विश्व परिवार का एक घटक है।दीपावली लौकिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार का पर्व है।दीपावली पर्व पर लक्ष्मी पूजन की परम्परा भारतीय संस्कृति में है।दीपावली से अनेक महापुरुषों के जीवन की घटनाएं जुड़ी हुई है।मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वनवास से पुनः अयोध्या में प्रवेश की घटना से जुड़ा है।उसी प्रकार दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़ी घटना भी है।भगवान महावीर तीस वर्ष में सन्यास ग्रहण किया थे।साढे बारह वर्ष तक एकान्त ,मौन ध्यान कयोत्सर्ग की साधना पूर्ण कर ज्ञानी बन गए।बहत्तर वर्ष पूर्ण होने के बाद तीन दिन तक लगातार उपदेश देते हुए दीपावली के अर्धरात्रि को निर्वाण को प्राप्त हुए।जैन धर्म के लोग भी दीपावली को निर्वाण उत्सव के रूप में मनाते है।जब प्रत्येक साधक अपने शरीर का उपयोग आत्मा साधना में करते हुए आत्मा में लीन होगे,तो दीपावली मनाना सार्थक होगा।दीपावली खुशियों का पर्व है खुशियां लेना और खुशियां देना इस त्यौहार का आध्यात्मिक स्वरूप है।लौकिक रुप भी खुशियां ही बांटना हैं।हमें जीवन का निर्माण इस ढंग से करना चाहिए कि हमारे आध्यात्मिक दीपक जलते रहे और जीवन में अन्धकार को मिटा कर प्रकाश की मर्यादाओं के दीपक, विश्व मैत्री के दीपक, और करुणा के दीपक जलाते रहो यही आध्यात्मिक दीपावली हैं और पर्व की सच्ची आराधना हैं। यही राष्ट्रीय पर्व पर एक दूसरे को खुशी का ईजहार करना चाहिए।

दिनेश रौनियार की रिपोर्ट

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