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भारत नेपाल सीमा पर नही थम रही रही तस्करी*

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ठूठीबारी/महराजगंज

क्रासर ःभारत-नेपाल सीमा ठूठीबारी व लक्ष्मीपुर खुर्द के रास्ते सफेद मटर व कालीमिर्च का काला कारोबार, सुरक्षा एजेंसियों को कोई फर्क नही

भारत-नेपाल की ठूठीबारी व लक्ष्मीपुर खुर्द सीमा पर बेखौफ़ सफेद मटर व कालीमिर्च की तस्करी जारी है। सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही रिकवरी वयां कर रही है कि तस्कर अपनी मकसद में कामयाब हो रहे है।इन दिनों इंडो-नेपाल बॉर्डर ठूठीबारी व लक्ष्मीपुर खुर्द के रास्ते सफेद मटर व कालीमिर्च के काले कारोबार को लेकर सुर्खियां काफीतेज़ है। पुलिस, एसएसबी व कस्टम की मिलीभगत से नेपाल वाया गोरखपुर कनाडियन मटर व वियतनामी कालीमिर्च की तस्करी कर तस्कर मालामाल ल हो रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि बॉर्डर पर तस्करी की मटर पकड़ी नहीं गई है, लेकिन पुलिस ,कस्टम व एसएसबी छिटपुट तस्करों को महज कुछ बोरी मटर के साथ पकड़कर कर अपनी पीठ तो थपथपा लिया करती है। यही वजह है कि तस्करी के इस काले कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि बार्डर पर लगातार हो रही कैनेडियन मटर व कालीमिर्च की कभी कभी बरामदगी खुद इस बात की गवाही दे रही है।
अगर नेपाल के रास्ते भारत में होने वाली तस्करी की बात की जाए तो रोजाना सैकड़ों क्विंटल मटर सरहद पार कर रही है जिस पर अंकुश लगा पाने में पुलिस ,कस्टम व एसएसबी पूरी तरह से फेल हैं। सख्ती के तमाम दावों के बावजूद नेपाली शराब, काली मिर्च और सुपाड़ी के बाद इन दिनों सफेद मटर का काला कारोबार सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रहा है।नेपाल से
भारतीय क्षेत्र ठूठीबारी ( मरचहवा ,टड़हवा ,कोतवाली के पश्चिम बंधे के रास्ते) ,राजबारी, लक्ष्मीपुर खुर्द, तुरकहिया, गरौड़ा आदि जगहो पर रात में लाकर स्टोर किया जाता हैं ।और फिर रात या दिन में पुलिस, कस्टम,एसएसबी से लाइन मिलते ही भारतीय क्षेत्र के बड़े शहरों में पिकप से पहुचा दिया जाता।सुरक्षा एजेंसियों को इसके बदले तस्करो द्वारा बधी बधाई मोटी रकम पहुचाई जाती है।
वहीं, अगर सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी पर नजर डालें तो इनके 24 घंटे सीमा पर चौकस रहने के बावजूद ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर खुर्द,बरगदवा के रास्ते हर दिन सैकड़ों क्विंटल मटर ,सोपारी,कास्मेटिक समान की खेप भारतीय सीमा में पहुंचाई जा रही है जो इनकी सतर्कता पर बड़ा सवाल है। हालांकि कभी कभी हो रही बरामदगी इस बात की गवाही दे रही है कि इन खुली सीमाओं से खुलेआम विदेशी मटरों की खेप भारतीय क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है।
इस कारोबार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रतिदिन सरकार के राजस्व को लाखों की चपत लगाकर आसपास के बाजारों से लेकर गोरखपुर के थोक बाजारों तक विदेशी मटर व काली मिर्च पहुंचाई जा रही है। जहां इसकी रोजाना अच्छी खासी डिमांड है। वहीं सरहद पार कर बाजार में आने के बाद इसे बरामद कर पाना तो दूर इसकी पहचान भी कर पाना कस्टम व पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
सूत्रों की माने तो ठूठीबारी व लक्ष्मीपुर खुर्द,
गड़ौरा तस्करी के इस पूरे कारोबार का हब बना हुआ है। अकेले गड़ौरा में मटर के पांच बड़े गोदाम हैं जहां हजारों बोरी मटर स्टोर की गई है और यहीं से फिर गोरखपुर व आसपास के जिलों में इसकी छोटी-छोटी खेप की रोजाना सप्लाई की जा रही है।

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